मत छोड़ मुझे इन राहों में !


ऐ काश कि तुम आ जाओ,   और भर लो मुझको बाहों में !
मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ, मत छोड़ मुझे इन राहों में !!

तेरी राह तकूँ मैं वरसों से,  बनकर सुर मैं साज़ों में !
मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ, मत छोड़ मुझे इन राहों में !!

आयेगा तू है मुझको यकीं , बनकर चाँद अँधेरी रातों में !
मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ, मत छोड़ मुझे इन राहों में !!

लो आज की रात भी बीत गयी, तेरी खट्टी-मीठी यादों में !
 मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ, मत छोड़ मुझे इन राहों में !!

अब आ भी जा और देर न कर, बस जा तू मेरी निगाहों में !
मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ, मत छोड़ मुझे इन राहों में !!

                                                           प्रमोद मौर्या "प्रेम"

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)  – (26 जुलाई 2012 को 2:29 am)  

बहुत बढ़िया!
अन्य लोगों के ब्लॉग पर भी तो टिप्पणिया दिया करो!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)  – (27 जुलाई 2012 को 4:39 am)  

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (28-07-2012) के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।
टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।
मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।
शिष्ट आचरण से सदा, अंकित करना भाव।।

सुशील  – (27 जुलाई 2012 को 7:28 pm)  

सुंदर !

मोह्ब्बत करते हो अच्छा किया बता दिया
मोह्ब्बत करने ने देखो तुमको कवि बना दिया !

veerubhai  – (27 जुलाई 2012 को 7:39 pm)  

बेलाग बिंदास अंदाज़ है आपके , ,दो टूक ,बिंदास गजल ..कृपया यहाँ भी पधारें -

कविता :पूडल ही पूडल
कविता :पूडल ही पूडल
डॉ .वागीश मेहता ,१२ १८ ,शब्दालोक ,गुडगाँव -१२२ ००१

जिधर देखिएगा ,है पूडल ही पूडल ,
इधर भी है पूडल ,उधर भी है पूडल .

(१)नहीं खेल आसाँ ,बनाया कंप्यूटर ,

यह सी .डी .में देखो ,नहीं कोई कमतर

फिर चाहे हो देसी ,या परदेसी पूडल

यह सोनी का पूडल ,वह गूगल का डूडल .

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib')  – (28 जुलाई 2012 को 2:40 am)  

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....
सादर।

शिवनाथ कुमार  – (28 जुलाई 2012 को 10:41 am)  

आयेगा तू है मुझको यकीं , बनकर चाँद अँधेरी रातों में !
मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ, मत छोड़ मुझे इन राहों में !!

बहुत खूब ...

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