इसलिए तेरा शहर छोड़ दिया !

 
मैं तुम्हें भूल जाऊं , इसलिए तेरा शहर छोड़ दिया !
मैं तुम्हें याद ना आऊँ, इसलिए तेरा शहर छोड़ दिया !!
 
इस शहर के हर नाके पर तू ही नज़र आता है !
मैं तुम्हें नज़र ना आऊं कहीं, इसलिए तेरा शहर छोड़ दिया !!
 
जब भी देखा तुमने मुझको, मुँह मोड़ लिया !
मैं तुम्हें दिख ना जाऊं कहीं, इसलिए तेरा शहर छोड़ दिया !
 
तेरा रास्ता मैं बार-बार पुल पे रोका करता था !
तू रुक ना जाये कहीं, इसलिए तेरा शहर छोड़ दिया !!
 
तेरा पीछा मैं रोज, छुपके-छुपके किया करता था !
मैं तेरे राज जान ना जाऊं कहीं, इसलिए तेरा शहर छोड़ दिया !!
 
मेरे सिवाय तुम सबसे, हंस के गले मिलते थे !
मैं तेरे गले लग ना जाऊं कहीं, इसलिए तेरा शहर छोड़ दिया !!
 
                                                                  प्रमोद मौर्य "प्रेम"

 

Unknown  – (13 अगस्त 2012 को 7:55 am)  

very nice, bro!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

Unknown  – (13 अगस्त 2012 को 7:56 am)  

very nice, bro!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  – (14 अगस्त 2012 को 12:26 am)  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
लिखते रहिए!

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