मैंने सिर्फ माँगा है आपको !

 
अपने खुदा से मैं, और क्या इल्तजा करूँ !
जब भी उठा है हाथ दुआवों में, मैंने सिर्फ माँगा है आपको !!
 
 ना सोना ना चाँदी ना हीरा ना मोती !
अपने दिल का सरताज, मैंने सिर्फ माना है आपको !!
 
दिन हो या रात हो सुबह हो या शाम !
हर पल अपने दिल के पास, मैंने सिर्फ पाया है आपको !!
 
 
तेरी एक मुस्कराहट पे, मेरी पूरी ज़िन्दगी कुर्बान !
बना कर रोशनी इन निगाहों में, मैंने सिर्फ बसाया है आपको !!
 
यूँ तो मिलते रहे मुझको, कदम कदम पे नए दोस्त !
अपना महबूब अपना हमदम, मैंने सिर्फ बनाया है आपको !!
 
                                                                    प्रमोद मौर्या "प्रेम"
 

 

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)  – (10 अगस्त 2012 को 5:23 am)  

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (11-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
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♥ !! जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ !! ♥

Pramod Maurya  – (10 अगस्त 2012 को 5:26 am)  

Apko ko bhi Janmastmi ki Hardik Subh Kaamnaye

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