मेरे मौला !

 
मेरी टूटी किस्मत संवार दे, मेरे मौला !
मेरा खोया प्यार मुझे लौटा दे, मेरे मौला !!
 
मैं तुझसे ज्यादा कुछ नहीं माँगता !
मेरा बिछड़ा हुआ यार मिला दे, मेरे मौला !!
 
जिसे देखकर मेरा चेहरा गुलाब सा खिल उठता था !
उस चेहरे की बस एक झलक दिखला दे, मेरे मौला !!
 
जिसकी आवाज सुनने को मैं पलपल तड़पता था !
उसकी आवाज मुझे फिर से सुना दे, मेरे मौला !!
 
जाने कितने बरस हो गये मुझे, मेरे चाँद को देखे !
अब के बरस तो मेरी ईद बना दे, मेरे मौला !!
 
मैं सजदा किया करता हूँ, उसके लिए सभी मजारों पर !
मेरे दिल की आवाज, उसके दिल तक पहुंचा दे, मेरे मौला !!
 
                                                                        प्रमोद मौर्य "प्रेम"
                                                       
 

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)  – (16 अगस्त 2012 को 6:29 am)  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
साझा करने के लिए धन्यवाद!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)  – (17 अगस्त 2012 को 5:07 am)  

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (18-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

सुशील  – (17 अगस्त 2012 को 7:21 pm)  

रुको हम भी कहे देते हैं मौला से

ये जो चाह रहा है
उसे करवा ही दे मौला !

कविता रावत  – (18 अगस्त 2012 को 6:53 am)  

बहुत सुन्दर कोमल भावों से सजी रचना ..

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