मेरे "दिल की आवाज" !

 
गज़ल क्या है, मुझे नहीं मालूम !
 
नज्म क्या है, मुझे नहीं मालूम !
 
कविता क्या है, मुझे नहीं मालूम!
 
अल्फाज़ क्या है, मुझे नहीं मालूम !
 
मैं तो लिखता हूँ बस अपने "दिल की आवाज" !
 
ये ही मेरी गज़ल है, ये ही मेरा नज्म है !
 
ये ही मेरी कविता है, ये ही मेरे अल्फाज़ है !
 
मेरे "दिल की आवाज" 
                                                     
                                                                     प्रमोद मौर्य "प्रेम"
 

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)  – (31 अगस्त 2012 को 5:02 am)  

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (01-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

बेनामी –   – (27 मई 2014 को 3:20 am)  

Chutiya kiya likha hai ye

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