आप यूँ ही हँसों और हँसाते रहो !!

 
आप हँसते हैं तो, फूल खिल जाते हैं !
आप यूँ ही हँसों और हँसाते रहो !!
 
आपकी ये हँसी है, मेरी जिन्दगी !
यूँ ही हँस कर, मेरी उम्र को बढ़ाते रहो !!
 
आपसे प्यारा है ना, इस जग में कोई !
आप यूँ ही प्यार, मुझ पर लुटाते रहो !!
 
आपकी बातें लगती है, सबसे अलग !
आप यूँ ही, मेरे दिल को बहलाते रहो !!
 
आप लगते हो दुनियाँ में सबसे हसीं !
मेरी तारीफ़, आप यूँ ही सुनाते रहो !!
 
आप का ये बदन है फूलों का गुलिस्ताँ !
खुद भी महकों और सबको महकाया करो !!
 
                                              प्रमोद मौर्या "प्रेम"
 
 

 

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)  – (11 अगस्त 2012 को 5:23 am)  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (12-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Vinod Maurya  – (11 अगस्त 2012 को 5:44 am)  

ha ha ha!!!!!!!!!! fir se vahi kahani!
ek tha prem aur ek thi rani!!!!!!!!!!!

Vinod Maurya  – (11 अगस्त 2012 को 5:44 am)  

ha ha ha!!!!!!!!!! fir se vahi kahani!
ek tha prem aur ek thi rani!!!!!!!!!!!

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